उपक्षम रामटेके
मुख्य कार्यकारी संपादक
कल ११ फरवरी २०२६ को दिल्ली की ऐतिहासिक धरती और जंतर-मंतर के गवाह बनते ही 1 लाख से अधिक क्रांतिकारियों ने साबित कर दिया कि जब-जब हकों पर बात आएगी,बहुजन समाज सड़कों पर अपनी ताकत दिखाएगा।….
भाई चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में ‘UGC कानून’ और छात्र हितों के लिए किया गया यह प्रदर्शन मात्र एक भीड़ नहीं,बल्कि बाबा साहेब के सपनों को सच करने का संकल्प है।बाबा साहेब के संविधान की वो ताकत, जो हमें लड़ने का हक देती है।
अनुच्छेद 15(4) और 15(5), यह अनुच्छेद राज्य को शक्ति देता है कि वह पिछड़ों,दलितों और आदिवासियों की शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान (आरक्षण) बनाए।
UGC के नियमों में किसी भी तरह की छेड़छाड़ इसी संवैधानिक सुरक्षा पर हमला है।अनुच्छेद 46, राज्य का यह कर्तव्य है कि वह समाज के कमजोर वर्गों,विशेषकर SC/ST के ‘शैक्षिक और आर्थिक’ हितों की रक्षा करे और उन्हें सामाजिक अन्याय से बचाए।…
अनुच्छेद 16 सार्वजनिक सेवाओं और नियुक्तियों में समान अवसर सुनिश्चित करता है।UGC के जरिए होने वाली नियुक्तियों में बाबा साहेब का यह सुरक्षा कवच हमारा सबसे बड़ा हथियार है।
हमारा संदेश साफ है,हम संविधान के दायरे में रहकर अपनी हिस्सेदारी माँग रहे हैं।अगर शिक्षा के मंदिरों (UGC) से हमारे अधिकारों को मिटाने की कोशिश की गई,तो जंतर-मंतर जैसी गूँज पूरे देश में सुनाई देगी।
इस सफल आंदोलन का हिस्सा बनने वाले हर साथी को क्रांतिकारी जय भीम!,”आपकी उपस्थिति ने आज सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है।



