सैय्यद ज़ाकिर
उपसंपादक
दखल न्यूज भारत
हींगनघाट :- स्थानीय जामा मस्जिद चौक परिसर स्थित शेरवानी उर्दू प्राइमरी स्कूल बंद हो ने के दरवाजे पर दस्तक दे रही है।कारण पड़ने वाले बच्चो की कमी है। सन 1918-119तक स्कूल का नाम अंजुमन उर्दू प्राइमरी स्कूल था।
बाद में प्रसिद्ध समाज सेवक बैरिस्टर शेरवानी के निधन के बाद उनकी याद में नगरपालिका ने इसका नाम बदलकर शेरवानी उर्दू प्राइमरी स्कूल रख दिया था। आज भी यही नाम से मशहूर हैं। शेरवानी उर्दू प्राइमरी स्कूल को सौ साल हो चुके है। यही शेरवानी उर्दू प्राइमरी स्कूल मुस्लिम समाज की बुनियाद है।
उर्दू जुबान की नफासत,शालीनता,मधुर,सम्मान, एक अपनापन है।इसी शेरवानी उर्दू प्राइमरी स्कूल से मुस्लिम बच्चे जज,डॉक्टर,वकील,पत्रकार,इंजीनियर,शिक्षक,ओर समाज सेवक बन चुके है। शहर की सबसे पुरानी शेरवानी उर्दू प्राइमरी स्कूल एक ही है। इसकी कामयाबी की बुलंदी पर रुकावट शिक्षको की लापरवाही ओर प्रशासन की अनदेखी का नतीज़ा है।मजबूत इरादे,ओर मेहनत से इसे दोबारा कामयाबी की बुलंदी पर लाया जा सकता है।अगर सब मिलकर कोशिश करे तो,? एड.सुधीर बाबू कोठारी के बेहतरीन मार्ग दर्शांसे इस कार्य को गति प्राप्त हुई है।
निवेदन देते हुए शाकिर खान पठान ,बेग साहब ,मकसूद बावा पत्रकार,शेख अशफाक ,अब्दुल कदीर बक्श पत्रकार ,गुड्डू मौलाना ,सैय्यद ज़ाकिर पत्रकार,आसिफ सोलंकी, नईम ,शेख इनायत खान ,लतीफ मलन नस ,आदि की उपस्थिति थी। “मैं उर्दू हूं मेरी ज़ुबान मीठी है। अर्श वाले मेरे हौसलो को सलामत रखना। फर्श के सारे खुदा ओ में उलझ बैठी हूं। मैं उर्दू हूं।



