Home देशविदेश राजनैतिक व्यंग्य-समागम… — मोदी जी का बचत अभियान :- विष्णु नागर..‌

राजनैतिक व्यंग्य-समागम… — मोदी जी का बचत अभियान :- विष्णु नागर..‌

     तो मोदी जी देशवासियों को एक साल‌ तक विदेश यात्रा न‌ करने का उपदेश देकर खुद यूरोप की हवाखोरी करने खिसक गए हैं। उनके निंदक कह रहे हैं कि ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे…’। ये तुलसीदास भी बहुत गड़बड़ आदमी थे। एक-दो लाइनों का ये ऐसा हथियार लोगों को थमा गए हैं कि ज़रा से इधर से उधर या उधर से इधर हुए नहीं कि लोग तुरंत इसे चेंप देते हैं, पर कोई बात नहीं। करो, जी भर कर निंदा करो, मोदी जी की। सुबह करो, शाम करो। दोपहर में करो। इस रविवार से अगले शनिवार तक करो। उसके दो साल बाद तक करो। अरे बनाना हो, तो‌ इसे चुनाव का मुद्दा बनाकर देख लो!

       मोदी जी छप्पन इंची हैं, वह निंदाओं-आलोचनाओं की परवाह नहीं करते। 18 घंटे ‘काम’ करते हैं, तो उन्हें सब हजम हो जाता है। जब तक उनकी गद्दी सुरक्षित है, इन छुटपुट आलोचनाओं से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, जब तक कि उस निंदा के साथ राहुल गांधी का नाम न जुड़ जाए! वे इतना चाहते हैं कि किसी न किसी बहाने उनकी चर्चा होती रहना चाहिए, चाहे बहाना एप्स्टीन फाइल का हो! उनकी मान्यता है कि बदनाम होंगे, तो क्या नाम न होगा! जरूर होगा, बल्कि बहुत ज्यादा होगा। दशकों, बल्कि सदियों तक होगा! उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य है कि किसी भी तरह उनका नाम हो! वैसे 2002 को अंजाम देकर उन्होंने इतिहास में पहले ही मुकम्मल जगह बना ली है,मगर वे यहीं रुके नहीं हैं!

        उन्हें उस बदनामी का इंतजार है,जिसकी धमकी उन्हें बार-बार दी जाती है। वे शूरवीर हैं, बता देंगे कि किसी फाइल में उनका नाम या फोटो आने से उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता। ऐसी फाइलें आती-जाती रहती हैं। जो मोदी या ट्रंप होते हैं, वे वीरतापूर्वक डटे रहते हैं। और जरूरत पड़े,तो रास्ते से फाइल गायब करवा देते हैं और भी अनेक हथकंडे हैं! 

        पर प्रशंसा करनेवाले मोदी जी की प्रशंसा खूब कर रहे हैं। कुछ जी खोलकर कर रहे हैं, तो कुछ कपड़े खोलकर! अब ये बात तो सही है न कि विदेश रवाना होने से पहले मोदी जी मात्र चार गाड़ियां का काफिला लेकर कैबिनेट की मीटिंग में गए थे। बताओ,जो छप्पन इंची पंजाब में कुछ दूरी पर किसानों के रास्ता जाम से डरकर उल्टे पांव लौट आया था,वही का वही पेट्रोल-डीजल बचाकर देशभक्ति का सबूत देने के लिए मात्र चार गाड़ियों के काफिले के साथ अपने बंगले से रवाना हुआ और वापस आया! इसके लिए साहस चाहिए!

      वह चाहते,तो कैबिनेट की बैठक अपने बंगले में बुला सकते थे,मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। देश के सामने चुनौती आई,तो फटाफट वह महाराणा प्रताप बन गए और उनका बाल कोई अकबर,कोई जयसिंह बांका नहीं कर पाया! वैसे आलोचकों की इस बात में भी दम है कि बांके कर सकें,इतने बाल अब उनकी खोपड़ी में बचे नहीं हैं और जितने भी हैं,सबके सब बांके-टेढ़े हैं!

      उनकी इस महाराणा प्रतापी का असर यह हुआ है कि उनके मंत्री भी एकाएक वीर होते चले गए हैं। उन्होंने अपने काफिले में पचास फीसदी की कमी कर दी है! फिर तो होड़ मच गई। कोई साइकिल पर जाकर पेट्रोल-डीजल बचा रहा है और उसके सुरक्षाकर्मी उसके साथ दौड़ लगाकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मन ही मन गालियां भी दे रहे हैं। कैमरामैन भी धंधे से लगे हुए हैं। अच्छा खासा ड्रामा क्रिएट हो रहा है।

     कोई बस से जा रहा है,कोई ई-रिक्शा से,कोई ई-कार से,कोई मेट्रो से। हर कोई आदर्श स्थापित करने में लगा हुआ है। कोई घोड़े से भी दफ्तर जरूर गया होगा, क्योंकि इससे विडियो जोरदार बनता है। कोई बैलगाड़ी चलाकर आया या नहीं, पता नहीं, मगर मोदी जी की नज़र में आने के लिए कोई भी मंत्री, कोई भी अफसर जान देने के अलावा बाकी कुछ भी करके दिखा सकता है। अगर देशभक्ति का दूसरा नाम पेट्रोल-डीजल की बचत है, तो फिर हाथ के बल पर चलकर भी आया-जाया सकता है!

      और जिनके पास पहला और आखिरी विकल्प बस या मेट्रो या लोकल ट्रेन है,वे देशभक्ति के प्रदर्शन के इस सुनहरे अवसर का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। खाने का तेल इतना महंगा है कि लोग दस प्रतिशत तेल में ही आज खाना बना रहे हैं। उसका भी दस प्रतिशत नहीं हो सकता! इससे अच्छा है कि बैंगन और मूली आदि को कच्चा ही चबा लिया जाए! आदिम अवस्था की ओर लौटने का यह सुनहरा मौका है!

      मतलब सरकार के स्तर पर ऊर्जा की इतनी अधिक बचत की जा रही है कि लगता है कि अगले कुछ महीनों में हम पेट्रोल-डीजल-गैस आदि निर्यात करने की स्थिति में आ जाएंगे। मुझे एक ही षड़यंत्र का डर है कि इस बीच कोई दुष्ट मोदी जी को उनपचासवीं या पचासवीं बार धमकी देने का ड्रामा कर सकता है। फिर तो मोदी जी को पचास कारों के काफिले के साथ चलने और रोड शो करने से दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं पाएगी! अभी तक तो उनके अंदर के महाराणा प्रताप ही जागा है,अगर वीर शिवाजी जी भी जाग गए, तो सोच लो अंजाम क्या होगा!

     (कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।)