फंड के लिए तरस रहे जिला पंचायत सदस्य

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भास्कर येवले
जिला प्रतिनिधी

राजनांदगांव, 27 अगस्त। पंचायती राज व्यवस्था के तहत चुने हुए जिला पंचायत सदस्य फंड के लिए तरस रहे है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए जिला एंव जनपद निधि की स्वीकृति प्रदान की थी। इस निधि के तहत जिला पंचायत सदस्यों को 12 लाख रूपए खर्च करने का वित्तीय अधिकार दिया गया था।
बताया जाता है कि जिला पंचायत इस निधि का अपने निर्वाचन क्षेत्र में अधोसरंचना से जुड़े कार्यो में खर्च करते थे। जिसमें मंच, सामुदायिक भवन समेत अन्य कार्य शामिल है। बताया जाता है कि राज्य में सरकार बदलने के बाद इस निधि को बंद कर दिया गया है। राजनांदगांव जिले के 25 जिला पंचायत सदस्य निधि के बंद होने से अपने क्षेत्र का विकास कराने में आर्थिक परेशानी से जूझ रहे है।
बताया जाता है कि भाजपा राज में सांसद व विधायक निधि की तर्ज पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने त्रि-स्तरीय पंचायत के सदस्यों के लिए निधि की शुरूआत की थी। जिला पंचायत सदस्यों के अधीन औसतन 60 से अधिक गांव होते है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस फंड का सदस्यों को अपने विवेकानुसार खर्च करने के अधिकार था। कांग्रेस सरकार के सत्तासीन होने के बाद यह निधि समाप्त कर दी गई है।
इस संबंध में जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने ‘छत्तीसगढ़ ’ से चर्चा में कहा कि सदस्य सिर्फ केंद्र की राशि से ही अपने क्षेत्रों का विकास करा रहे है। राज्य सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता दी मिल रही है। यह दुर्भाग्य है कि भाजपा शासन में मिल रही निधि को कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक द्वेष के तहत बंद कर दिया। इस बीच निधि बंद होने से कांग्रेस समर्थित सदस्य भी हलाकान है। सत्तारूढ़ दल से होने के कारण सदस्य खुलकर विरोध नही कर रहे है। अंदरूनी रूप से फंड को बंद करने पर कांग्रेस सदस्यों को भी ऐतराज है।
उधर निधि बंद किए जाने पर जिला पंचायत सीईओ तनूजा सलाम ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि शासन स्तर पर निधि को बंद करने का निर्णय लिया गया है। राजनांदगांव जिले का एक बड़ा हिस्सा वनांचल के दायरे में है। बताया जाता है कि भाजपा सरकार ने ग्रामीण तथा अंदरूनी इलाको की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए इस फंड को मंजूरी दी थी। कांग्रेस सरकार ने फंड को गैरजरूरी बताते हुए समाप्त कर सदस्यों के वित्तीय अधिकार में सीधे कटौती कर दी