सोमनपल्ली नाला। नाले पर ब्रीडज निर्माण में विलंभ।

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दिपक बेडके सिरोंचा प्रतिनिधि

कहते है किस भी क्षेत्र में सड़क विकास के द्वार होते है। सड़क के जरिये विकास के नए आयाम हासिल किए जाते है। उन क्षेत्रों में विशेषकर सड़कों का महत्व अत्याधिक बड़ जाते है। जो क्षेत्र सदियों से वीकास से सीधे तौर पर जुड़ नही पाए है।। मगर कुछ एक संदर्भो पर सरकार के विभागों के आपसी सामंजस्य में कमी एवं जरूरी औपचारिकताओं में विलम्भ के चलते इन्हें धरातल पर मूर्त रूप लेने में ज्यादा समय व्यतीत होते नजर आता है। जिसके चलते इन बहुद्देश्यीय सड़कों का महत्व कम होते नजर आता है। इसका असर उन क्षेत्रों से सड़क के जरिये होने वाले व्यापर, सामाजिक रिश्तों के आदान प्रदान, लोगों के आवागमन पर भी दिखने लगता है ।।

ऐसे ही सड़क है राष्ट्रीय राज मार्ग 16 जो बाद में 63 में परिवर्तित हुई है। जानकारों की माने तो इस सड़क के जरिये पश्चिमी भारत यानी मुम्बई को पूर्वी भारत कलकत्ता से जोड़ना के था। इसके तहत बहुद हद तक सड़क बन भी गयी है। जो तेलंगाना के निजामाबाद से छत्तीसगढ़ के जगदलपुर को जोड़ती हुई हाल ही के वर्षों में बनाई गयी है। जहाँ से यह सड़क पूर्वी एवं पश्चिमी भारत को जोड़ती है। मगर इसका कुछ हिस्सा महाराष्ट्र के सिरोंचा तहसील से होकर गुजरती है। जो सिरोंचा शहर के धर्मापुरी से छत्तीसगढ़ के सीमा के अंतिम गांव पातगुड़म पर समाप्त होती है। इसी बीच सोमनपल्ली गांव के समीप नाले पर ब्रीडज बनना आज भी शेष है। जिसके चलते इस सड़क का उद्देश्य आज भी अधूरी बनी हुई है। सड़क निर्माण से जुड़े विभाग के सूत्रों की माने तो वन विभाग के NOC के मिलने में हो रही विलंब के चलते नाले पर ब्रीडज निर्माण में देरी हो रही है। जबकि उक्त नाले पर ब्रीडज के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूर्ण की गई है। सड़क निर्माण से जुड़ी विभाग की माने तो इस सड़क के निर्माण के चलते वन संपदा के नुकसान की भरपाई की राशि 2014-15 के दरम्यान वन प्रशासन को अदा की गई है। बावजूद उसके वन विभाग संबंधित विभाग को NOC देने में विलंब कर रही है। इसका असर ब्रीडज निर्माण के दिशा में देरी के रूप में दिखने कि बात कही जा रही है।

संघर्ष का नतीजा ही यह राज मार्ग एवं नदियों पर पुल पुलिये है।

सिरोंचा के लोगों की माने तो सिरोंचा क्षेत्र के सर्वांगिनी विकास एवं विकास की कछुआ गति को लेकर सिरोंचा विकास परिषद के नाम पर एक जन आंदोलन चलाई गई थी। जिसमे क्षेत्र के सभी पक्ष के लोग शामिल हुए थे। उस दरम्यान एक स्वर में आवाज बुलंद की गई थी कि वीकास करो अन्यथा विभाजित कर अविभाजित आंध्र में तहसील को सम्मिलित करें। उस आंदोलन से जुड़े हुए लोगो बताते है कि उस आंदोलन का नतीजा ही रह कि तात्कालीन सरकार में लोक निर्माण मंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस आंदोलन को संज्ञान में लेते हुए तहसिल क्षेत्र के विकास के दिशा में प्रयास प्रारंभ हुए । उसके तहत इस राज मार्ग का परिकल्पना भी करते हुए इसके निर्माण के दिशा में प्रयासों की शुरुवात हुई थी। इसके तहत तहसिल में बीआरओ ने कदम रखा।बीआरओ ने सड़क निऑन कार्यों की शुरुवात कि। सिरोंचा से आसरअल्ली तक बीआरओ ने सड़क निर्माण भी किया। उसके बाद उनकी अन्यत्र स्थान पर स्थानांतरण हुआ। इसका जिम्मा केंद्रीय सड़क निर्माण विभाग के हाथों चले गया। जानकार बताते है कि वर्ष 1997-98 के दरम्यान लेफ़्ट्विंग एक्स्ट्रिमिंस्ट एक्टिविटी फंड के तहत दो ब्रीडजों की स्वीकृति मिली। वे आज बनकर तैयार भी हो चुके है। मगर नाले पर ब्रीडज के अभाव में यह सड़क परियोजना अपने उद्देश्य में पूरी तरह से सफल नही हो पा रही है। *आज भी इस नाले पर पूर्व के वर्षों में बनी पुलिया के भरोसे आवागमन हो रही है। बरसात ले दिनों में लगातार बारिश होने पर समीपस्थ नदी इंद्रावती में बाढ़ के हालात निर्मित होते ही इस नाले पर भी बाढ़ आ जाती है। जिसके चलते यह सड़क कभी कभार दो से चार दिनों एवं ज्यादा बाढ़ आने पर लगभग सप्ताह भर आवागमन नाव के जरिये करनी पड़ती है। इससे इस सड़क परियोजना का स्वप्न अधूरी जान पड़ती है।
सांसद नेते ने भी ली अधिकारियों की बैठक।
स्थानीय भाजपा से जुड़े लोगों की माने तो हाल ही के दिनों में स्थानीय सांसद अशोक नेते ने इस संधर्भ में स्थानीय विश्राम गृह पर दोनों विभागों के आला अधिकारियों से ली गयी बैठक के दरम्यान वास्तु स्थिति से अवगत होते हुए अड़चनों को दूर कर निर्माण के दिशा में पहल करने को कहा है। इसके अलावा वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी कर विभाग के तरफ से हो रही देरी को दूर करने को कहा है।साथ ही गड़चिरोली के जिला प्रशासन से भी जानकारी मांग ने की बात कही है। आलम जो भी हो पुलिया निर्माण के दिशा में आ रहे अढ़चनों को दूर कर अतीशीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ करने की मांग लोगों नें की है। ताकि तहसील क्षेत्र इस सड़क के जरिये पूर्वी एवं पश्चिमी भारत से सड़क के जरिये बारहमासी तौर पर सीधे जूड़ सकें। सिरोंचा विकास परिषद के स्वप्न भी पूरी हो सके।लोगों को भी सुविधाजनक एवं सुरक्षित यात्रा सम्भव हो सके।