हिंगणघाट प्रशासन की लापरवाही से शहर मे कोरोना का प्रभाव बढ़ा,मगर संबंधित विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली यथावत।। — नागरिकों का प्रशासन के खिलाप रोष…

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सैयद जाकिर
उपजिल्हा प्रतिनिधी वर्धा.
हिंगणघाट शहर में दिनोदिन कोरोना महामारी का दुष्प्रभाव बढ़ता जा रहा है।लेकिन इस महामारी को लेकर प्रशासन के नियंत्रण और नियोजन मे निष्क्रियता दिखाई दे रही है।बाहर से आने वाली जनता के शहर मे प्रवेश पर नियंत्रण नहीं है।जान पहचान वाले हाय हैलो करके निकल जाते हैं और अंजान लोग सुविधानूसार शहर के सीमारक्षकों की जेबें गर्म करके निकल जाते हैं,इस गंभीर विषय को लेकर शहर मे चर्चाओं का बाजार गरम है।
सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संबंध मे कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।नगरपरिषद स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से शहर की सफाई व्यवस्था लड़खड़ा गयी है।शहर के मुख्य मार्ग छोड़कर अन्यत्र गंदगी का साम्राज्य है।शिकायत करने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा बहाने बनाकर टालमटोल की नीति अपनायी जाती है।शहर के उपजिल्हा कुटीररुगणालय मे भी अव्यवस्था का आलम है।मरीजों की जाँचपड़ताल मे लापरवाही बरती जा रही है।बाहर से आनेवाले मरीजों को होम क्वाॅरंटाइन किया जाता है।बाद मे ये लोग सामान्य जनता के बीच भटकते दिखाई देते हैं।जिससे शहर के लोगों मे भय का माहोल है।
बाहर से आनेवाले मरीज या अन्य जनता को सख्ती से संस्थात्मक क्वाॅरंटाईन किया जाये ऐसी जनता की माँग है।चाटुकारिता मे माहिर कम उम्र वाले करमचारियों को कार्यालय के काम दिये जाते हैं।जिल्हा प्रशासन की घोषणा के बावजूद कोरोना विरोध मोहिम मे काम करनेवाले कर्मचारियों को बीमा सुरक्षाकवच प्राप्त नहीं हुआ है।यहाँ तक की उन्हे कोरोना विरोध मोहिम संबंधित साधे पहचानपत्र भी नहीं दिये गये।
लाकडाउन के चलते पोलिसविभाग,महसूल विभाग, नगरपरिषद कर्मचारी धन उगाड़ी करने की जनता में जो चर्चा हैं,”उस,चर्चा को देखते हुये उच्चस्तर पर इन सब अव्यवस्थाओं की जाँच होगी क्या?ऐसे प्रश्न सामान्य जनता के मन मे उठ रहे हैं।