स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर, नागपुर में सांड कि मौत पर मैनेजर द्वारा गुमराह करने का आरोप स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर, धंतोली नागपुर में व्यापक अनियमितता है कोई गोतस्करी का मामला? जांच कि मांग

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सुनील उत्तमराव साळवे
(९६३७६६१३७८)
कार्यकारी संपादक, दखल न्यूज भारत नागपुर

कोराडी / नागपुर: २५ जुलै २०२०
नागपुर जिले के कोराडी निवासी समाजसेवी डॉ. इंदु भजनदास भिमटे द्वारा जारी एक प्रेस नोट में उन्होंने बताया कि, कोराडी मे उनके निवासस्थान में रह रहे एक सांड का एक्सिडेंट होने से पैर कटा होने पर उन्होने पशु संवर्धन संस्था से जुड़े आशिष कोल्हे नामक व्यक्ति को दि. ८ जुन २०२० को संपर्क किया। उसके बाद नागपुर मनपा के कोंडवाडा विभाग द्वारा कुछ कर्मचारी दि. ९ जुलै २०२० को कोराडी आए। और इस सांड को अपने कोंडवाडा कि गाडी में उपचारार्थ नागपुर के स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर में लेकर गए।
उस सांड पर दि. १२ जुन २०२० तक कोई शल्यक्रिया हुई नहीं थी। वहां जाकर स्वयं डॉ. इंदु भिमटे ने निरिक्षण और पुछताछ कि, पाच दिनो बाद उन्हें फोनपर बताया गया कि इस सांड पर सफलतापूर्वक शस्त्रक्रिया हो चुकी है, तथा सांड स्वस्थ है। डॉ. इंदु भिमटे जी को स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर के व्यवस्थापक द्वारा बताया गया कि १५ दिन बाद उस सांड को उनके घर लाकर छोडा जाएगा।
लेकिन १० जुलै २०२० को गोरक्षण समिती के पदाधिकारियों से मोबाईल पर संपर्क करने के बाद उस सांड कि मौत होने कि बात डॉ. इंदु भिमटे को पता चली। ११ जुलै २०२० को स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर धंतोली मे डॉ. इंदु भिमटे इसके बारे में जानकारी लेने पहुची तो उन्हें इस बारे में कर्मचारियों द्वारा जानकारी देने से मना किया।
इस बारे में डॉ. इंदु भिमटे ने वहां के शल्य चिकित्सक डॉ. मयुर काटे से मोबाईल पर संपर्क करने पर बताया कि शल्यक्रिया सफल होने के बाद सांड पुरी तरह स्वस्थ था, लेकिन ४-५ दिनो बाद उस सांड कि मौत हुई। इस बारे मे वहां के व्यवस्थापक कोलवडकर जी से मोबाईल पर संपर्क करने कि डॉ. मयुर काटे ने सलाह दी। व्यवस्थापक कोलवडकर जी से इस सांड कि मौत कैसे हुई ऐसा सवाल डॉ. इंदु भिमटे ने पुछने पर वो संतोषजनक जवाब दे नहीं पाए। उस सांड कि मौत पर ना तो डाँ. मयुर काटे, ना ही व्यवस्थापक कोलवडकर जी ने लिखित जवाब दिया।
डॉ. इंदु भिमटे ने इस संदर्भ में पशुसंवर्धन मंत्री, महाराष्ट्र राज्य, नागपुर मनपा आयुक्त तुकाराम मुंडे, जिल्हाधिकारी नागपुर, तथा महापौर मनपा नागपुर को लिखित शिकायत कर इस सांड कि मौत कि जांच करने कि मांग कि है। डॉ. इंदु भिमटे ने हमारे दखल न्युज भारत पोर्टल व यु ट्युब चैनल के कार्यकारी संपादक सुनील साळवे को मोबाईल पर बताते हुए, कहा कि शल्यक्रिया सफल होने के बाद स्वस्थ सांड कि मौत के पीछे गोतस्करी भी होने का अनुमान लगता ह। शल्यक्रिया होने के बाद उस सांड कि कोई ठीक देखरेख स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर समिती कर नहीं पाई, इस सांड को ४-५ बार खाने हरा चारा ,चोखर ना मिलने से मौत होने का आरोप डॉ. इंदु भिमटे ने लगाया।
इस बारे में शल्यचिकित्सक डॉ. मयुर काटे से दखल न्युज भारत पोर्टल व यु ट्युब चैनल के कार्यकारी संपादक सुनील साळवे ने बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने शल्यक्रिया सफलतापूर्वक कि उसके बाद इस सांड कि हालत अच्छी और वह स्वस्थ था। लेकिन उसके बाद उसके देखभाल कि जिम्मेदारी स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर समिती कि है, वह वहां जाकर सेवाभाव से निःशुल्क सेवा देते है ऐसा डॉ. मयुर काटे ने बताया। जबकि यहां के व्यवस्थापक कोलवडकर जी से मोबाइल पर संपर्क होने पर उन्होंने बताया कि, यहा ३०० के करिब पशु है, तथा यह परिसर पुरी तरहा खुला है आसमान के नीचे इसपर कोई छत नहीं है हम सभी जानवरों को चारा डालते है, लेकिन ३०० जानवरों पर हम पुरी तरह निगरानी नहीं रख सकते हैं। यहां पर कई राजनेता तथा पुलिस आकर हमको धमकियाँ देते है कोई केस में फंसा देंगे। हमको सरकार कि ओर से कोई आर्थिक मदत मिलती नहीं है। इसलिए हम चाहकर भी यहां के सभी जानवरों कि ठीक से देखभाल नहीं कर पाए हो। यहां हजारों टन स्क्रैप पडा हुआ है, लेकिन यहां नागपुर मनपा या पुलिस कोई भी कारवाई नहीं करते है। ऐसा यहां के व्यवस्थापक कोलवडकर जी ने बताया। इस सांड कि मौत किसे वजह से हुई, इस बारे मे उसके बारे मे डाँक्टर्स द्वारा लिखित है। वहां किसी भी प्रकार कि गोतस्करी होने का उन्होने इंकार किया।
…. अब इस सांड कि मौत का मामला गर्माते जा रहा है। क्या इस ट्रस्ट को सरकार कि ओर से कोई आर्थिक मदत मिलती नहीं? क्या नागपुर मनपा कुछ भी मदत या कोई देखरेख करती नहीं है? क्या इस गोरक्षण परिसर में छत क्यों नहीं? क्या एक्सिडेंट मे जख्मी जानवरों पर शल्यक्रिया होने के बाद उन्हें किसी शेड में बांधा क्यों नहीं जाता? क्या शल्यक्रिया हुए जानवरों कि रोजाना पशुचिकित्सक डाँक्टर्स तथा व्यवस्थापक द्वारा जाँच या खानपान कि देखरेख ठीक से क्यों नहीं कर पाए? अपनी कैपासिटी के बाहर जादा पशुओं को आप स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर, धंतोली में क्यों रखते हो? शल्यक्रिया होने के बाद एक स्वस्थ और धष्टपुष्ट सांड कि मौत कैसे हो सकती है? शल्यक्रिया होने के बाद इस सांड के कटे हुए पैर को सर्जरी के बाद बैंडेज हुवा था तो उसके जख्मी पैरो मे बारिश का पानी कैसे घुसने दिया? इस सांड कि मौत के बाद डॉ. इंदु भिमटे जी को क्यों सुचना नहीं दी?ऐसे सारे सवालों को लेकर समाजसेवी डॉ. इंदु भिमटे द्वारा स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर, धंतोली नागपूर समिती पर किए आरोपी कि अब जांच कि मांग उठी है। तथा उसके मौत को लेकर डॉ. इंदु भिमटे द्वारा उठाए सवाल और जांच अब मनपा आयुक्त तुकाराम मुंडे, महापौर, नागपुर तथा जिल्हाधिकारी नागपुर और पशुसंवर्धन मंत्री पर टिकी है, ये जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि स्व. मोरोपंत पिंगळे गोरक्षण परिसर, धंतोली मे व्याप्त अनियमितता और धांदली है या फिर यहां के लोग किसी गोतस्करी रैकेट से जुडे है? यह जांच के बाद ही पता चलेगा।